Search

Loading

Wednesday, April 11, 2018

राजस्थान में खून की नदी न बहाने दें


राजस्थान में खून की नदी न बहाने दें 

राजस्थान सरकार के एक अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय से यहाँ खून की नदियां बहने का रास्ता साफ़ हो गया है. 

कृपया नीचे दिए हुए लिंक पर अपना विरोध दर्ज़ कराएं.  
Protest Rajasthan Bovine Animals Amendment Bill 2018 that leads to buffalo slaughtering

cruelty to animals Buffalo slaughter
भैंस का क्रूरतापूर्ण क़त्ल 
९ मार्च 2018 को राजस्थान विधानसभा ने राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) विधेयक 1995 (मूल विधेयक) में कुछ संशोधन किये हैं.
 राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) वि धेयक 1995 (मूल विधेयक)

इस संशोधित विधेयक में गोवंश की परिभाषा से भैंस प्रजाति को बाहर निकल दिया गया है. अब तक गाय के साथ भैंसों की हत्या पर भी राजस्थान प्रदेश में प्रतिवंध था. लेकिन इस संशोधन के बाद अब भैंसों के क़त्ल का रास्ता साफ़ हो गया है.

राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2018 

छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्ड, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, आन्ध्र प्रदेश अदि अनेक प्रदेशों में अभी भी गाय के साथ भैंसों की हत्या पर प्रतिवंध है; फिर क्या कारण है की राजस्थान सरकार ने जल्दबाज़ी में ऐसा बेतुका कदम उठाया? समाचार माध्यमों के अनुसार यह कदम माँस निर्यातकों को खुश करने के लिए उठाया गया है.  





भैंस के क्रूरतापूर्ण क़त्ल का वीडियो 

२०१२ की पशु गणना के अनुसार राजस्थान प्रदेश में १ करोड़ ३३ लाख गाय (प्रजाति) एवं १ करोड़ २९ लाख ७६ हज़ार भैंस (प्रजाति) है. इसका अर्थ ये हुआ की गाय और भैंस लगभग सामान संख्या में है.

भैंसों की हत्या पर प्रतिवंध हटने से प्रति वर्ष लाखों की संख्या में भैंसें कत्लखाने जाएगी और यहाँ खून की नदियां बहेगी. दूध एवं गोवर की कमी होगी। दूध एवं दुग्धजात पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी होगी. पर्यावरण को नुकसान होगा. भैंस बोझ ढोने का भी काम करता है इस प्रकार वह मनुष्य के लिए उपयोगी बनता है. राजस्थान के टोंक जिले में नदी किनारे से खरबूजा ढोकर लाने में भैंसों का बखूबी उपयोग होता है.

बोझ ढोते हुए भैंस 
अब तक राजस्थान में कोई बड़ा यांत्रिक कत्लखाना नहीं है और यह इस प्रदेश की अहिंसक एवं शांतिपूर्ण छवि को दर्शाता है. लेकिन इस विधेयक में संशोधन से प्रदेश की अहिंसक छवि समाप्त हो जाएगी।

भारत में सर्बप्रथम राजस्थान में ही पशु और पक्षी बलि (प्रतिषेध अधिनियम) 1975 पारित किया गया था. जिसे बाद में अन्य राज्यों द्वारा इसका अनुकरण किया गया. यह कानून, पशु और पक्षी बलि (प्रतिषेध अधिनियम) 1975, बना कर राजस्थान ने जो यश प्राप्त किया था  राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2018 लाकर वर्त्तमान सरकार ने राज्य को उतना ही कलंकित किया है.

Devji Patel against Buffalo slaughter
भैंसों के क़त्ल के विरोध में सांसद देवजी पटेल 

Parliamentarian Devji Patel against slaughter houses
भैंसों के क़त्ल के विरोध में सांसद देवजी पटेल 
राजस्थान के जालोर-सिरोही संसदीय क्षेत्र से सांसद देवजी पटेल ने लोकसभा में कृषि राज्यमंत्री कृष्णराज से भैंसों के क़त्ल के सम्वन्ध में प्रश्न पूछा था एवं बूचड़खानों को बंद करने की मांग की थी. २४ मार्च २०१८ को अनेक समाचार पत्रों ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था.

आश्चर्य की बात ये है की भाजपा ही नहीं कॉंग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी राजस्थान विधानसभा में इस संशोधन का विरोध नहीं किया न ही भैंसों को इस विधेयक में से हटाने पर कोई चर्चा हुई. ऐसा पता चला है की केवल माननीय विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने इसके विरोध में सदन से बहिर्गमन किया था.

८ अप्रैल को शिवजीराम भवन जयपुर में आयोजित एक सभा में, जिसमे राजपूत, जैन, अग्रवाल, माहेश्वरी, खंडेलवाल, ब्राह्मण, सिख, मुस्लमान अदि सभी समुदाय के लोग उपस्थित थे; इस संशोधन का विरोध किया गया. सभा में लगभग ३००० लोग मौजूद थे.

Rajasthan Bovine Animals Amendment Bill 2018 news
गोवंश हत्या प्रतिषेध कानून में संशोधन का विरोध समाचार 

प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2018 पर माननीय राज्यपाल महोदय के हस्ताक्षर हो गए हैं एवं यह महामहिम राष्ट्रपति जी के दस्तखत के लिए गया भेजा गया है और वर्त्तमान में यह विधेयक केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय में लंबित है.

जिस समय यह विधेयक प्रस्तावित था उस समय ही श्री खिल्लीमल जी जैन, पूर्व विधायक अलवर, ने मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को पत्र लिख कर इस पर अपना विरोध जताया था. मैं भी १५ दिन पूर्व अपना  विरोध मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गेहलोत, श्री अशोक परनामी, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा, श्री सचिन पाइलॉट, प्रदेशाध्यक्ष, कोन्ग्रेस पार्टी सभी को जता चूका हूँ.

श्री जसराज जी श्रीश्रीमाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन परिषद् ; श्री शांतिलाल जी सालेचा हैदराबाद आदि भी इस विधेयक के विरोध में कार्य कर रहें हैं एवं विभिन्न स्थानों में घूम घूम कर प्रचार कर रहे हैं. परम पूज्य खरतर गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज, मुनि श्री धैर्यसुन्दर विजय जी  एवं प्रवर्तिनी साध्वी श्री शशिप्रभा श्री जी, साध्वी श्री सुरेखा श्री जी अदि भी इसके विरोध में अपना स्वर मुखर कर चुकी हैं.

श्री अंकित टुंकलिया ने Change.org के माध्यम से अपना विरोध दर्ज़ कराया था एवं कल मैंने भी महामहिम राष्ट्रपति जी को पत्र लिखकर एवं Change.org के माध्यम से अपना विरोध दर्ज़ कराया है. मेरे जैसे अनेक अहिंसाप्रेमी लोग भी अपना विरोध विभिन्न माध्यमों से व्यक्त कर रहे हैं. कृपया नीचे दिए हुए लिंक पर अपना विरोध दर्ज़ कराएं.  
Protest Rajasthan Bovine Animals Amendment Bill 2018 that leads to buffalo slaughtering

कृपया महामहिम राष्ट्रपति जी,  देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, एवं राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधराराजे को पात्र लिख कर अपना विरोध दर्ज़ कराएं एवं औरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें. जीवों से प्रेम (करुणा) केवल धर्म व पुण्य ही नहीं है अपितु यह हमारा संवैधानिक कर्तव्य भी है. आइये इस कर्त्तव्य का पालन कर अक्षय पुण्य के भागी बनें.

Cow, buffalo slaughter should be banned: Minister Maneka Gandhi to NDTV




Rajasthan Bovine Animals Amendment Bill 2018

महामहिम राष्ट्रपति जी को लिखे मेरे पत्र की प्रतिलिपि

महामहिम राष्ट्रपति महोदय,
भारत सरकार 
नई दिल्ली 

विषय: राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक के क्रम में 

मान्यवर महोदय,


सादर प्रणाम। उपरोक्त विषय में निवेदन है कि राज्य विधानसभा में राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक २०१८ पारित किया गया है जिसमें धारा २ के तहत पशु की परिभाषा में से भैंस को विलोपित किया गया है। जबकि अन्य सभी संशोधन उचित व आवश्यक है तथा स्वागत किये जाने योग्य हैं। यह संशोधन आपके पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है 

मान्यवर महोदय,

उपरोक्त संशोधन से राजस्थान में से भैंसों का निकास बढेगा व दूध की उपलब्धता प्रभावित होगी।क्योंकि भैंस दुधारू पशु है एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में भैंस पाली जाती हैं जो कि उनके भरण पोषण का भी साधन है। प्रस्तावित संशोधन से हिंसा को बढ़ावा मिलेगा व दूध की किल्लत होगी। हमारे देश में दूध के उत्पादन में भैंसों का योगदान दो तिहाई है।

यदि भैंसों को उपरोक्त अधिनियम के प्रावधानों से बाहर कर दिया गया तो उनका कत्ल बढेगा एवं मांस निर्यात को बढावा मिलेगा। इससे प्रस्तावित संशोधन मीट लाबी द्वारा लाया गया भी प्रतीत हो रहा है।

भैंसों की कमी के कारण अपमिश्रण बढेगा एवँ रासायनिक दूध के उत्पादन में वृद्धि होगी जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडेगा।

उपरोक्त संशोधन राजस्थान बोवाइन एनिमल्स एक्ट की मूलभावना के विपरीत है।
उपरोक्त अधिनियम जब १९९५ में पारित किया गया था उस समय उपरोक्त अधिनियम की जो मूल भावना थी उसका संशोधन विधेयक २०१८ में ध्यान नहीं रखा गया है ।

उपरोक्त अधिनियम की मूल भावना को नीचे पुन उद्धत किया जा रहा है ।

"With the growing awareness of non-conventional energy sources like biogas the necessity of dung of these bovine species has gained further importance in addition to its utility as manure and as a fuel for the rural population. Such cattle even when they cease to be capable of yielding milk or breeding or working drought cattle can no longer consider as useless".

"In order to protect and improve the natural environment by minimizing dependence on chemical fertilizers and pesticides and by using natural and soil friendly manure generated by these bovine animals. The slaughtering of these animals needs to be strictly prohibited".

उपरोक्त संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद ४८ व ५१ए/जी। के प्रावधानों की भावना के विपरीत है तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में कई निर्णय पारित किए हुए हैं ।

आप से प्रार्थना है कि आप उपरोक्त संशोधन बिल में से धारा २ के तहत प्रस्तावित संशोधन को विधेयक से हटाने पर पुनर्विचार करने की कृपा करें । 

Article 48 in The Constitution Of India 1949
The organization of agriculture and animal husbandry The State shall endeavor to organize agriculture and animal husbandry on modern and scientific lines and shall, in particular, take steps for preserving and improving the breeds, and prohibiting the slaughter, of cows and calves and other milch and draught cattle.

Article 51A(g) in The Constitution Of India 1949

(g) to protect and improve the natural environment including forests, lakes, rivers, and wildlife, and to have compassion for living creatures;




The Indian Express, February, 26

President Ram Nath Kovind asked the Vasundhara Raje-led government to make a clarification in the Act and asked them to exclude buffaloes in the list of bovine animals, state Parliamentary Affairs Minister Rajendra Rathore said.

President Ram Nath Kovind on Monday approved amendments to the Rajasthan Bovine Animals (Prohibition of Slaughter and Regulation of Temporary Migration or Export) Act 1995, which gives the authorities the right to seize vehicles used in the illegal transportation of cows, besides making such an act punishable with arrest. However, Kovind has asked the Vasundhara Raje-led government to make a clarification in the Act and asked them not to include buffaloes in the list of bovine animals, ANI quoted state Parliamentary Affairs Minister Rajendra Rathore as saying.



  राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) वि धेयक 1995 (मूल विधेयक)

राजस्‍थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2018 

Thanks,
Jyoti Kothari

Vardhaman Infotech
eCommerce and Mobile Application development 
Jaipur, Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com

allvoices

No comments: