जयपुर में विभिन्न संघों द्वारा संचालित श्वेताम्बर जैन मंदिर
खरतरगच्छ संघ द्वारा संचालित श्वेताम्बर जैन मंदिरों के अतिरिक्त, तपागच्छ संघ, श्रीमाल सभा, मुलतान सभा तथा विभिन्न कॉलोनियों के स्थानीय संघों एवं संस्थाओं द्वारा भी जयपुर में अनेक श्वेताम्बर जैन मंदिरों का संचालन किया जाता है। इसके साथ ही कुछ मंदिर निजी ट्रस्टों के अधीन भी संचालित हैं।
श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ द्वारा संचालित जिनालय
श्री सुमतिनाथ प्राचीन जिनालय
जौहरी बाज़ार के घीवालों के रास्ते में स्थित लगभग 250 वर्ष से अधिक प्राचीन श्री सुमतिनाथ भगवान का यह मंदिर अत्यंत सुन्दर एवं मनोहारी है। मंदिर में काँच तथा स्वर्ण अलंकरण का अत्यंत आकर्षक कार्य किया गया है। यहाँ अनेक जिनप्रतिमाएँ प्रतिष्ठित हैं तथा सम्पूर्ण परिसर कलात्मक चित्रकारी से अलंकृत है।
मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित अनेक मूर्तियों के मध्य अत्यंत प्राचीन खड्गासन मुद्रा में विराजमान भगवान महावीर की प्रतिमा विशेष रूप से दर्शनीय है, जो भक्तों का ध्यान सहज ही आकर्षित करती है।
श्री सीमंधर स्वामी जिनालय
जयपुर के जनता कॉलोनी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का निर्माण लगभग 30 वर्ष पूर्व डॉ. भागचंद जी छाजेड़ द्वारा कराया गया, जिन्होंने इसे तपागच्छ संघ को समर्पित किया। तब से यह मंदिर संघ के अधीन संचालित है।
महाविदेह क्षेत्र में वर्तमान में विराजमान तीर्थंकर सीमंधर स्वामी को समर्पित जयपुर का यह एकमात्र मंदिर है, जो इसे विशेष महत्त्व प्रदान करता है।
श्री ऋषभदेव स्वामी मंदिर, बरखेड़ा तीर्थ
जयपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर टोंक रोड पर शिवदासपुरा के समीप स्थित यह मंदिर अब एक विकसित तीर्थक्षेत्र का रूप ले चुका है। लगभग 400 वर्ष प्राचीन इस मंदिर का तपागच्छ संघ द्वारा जीर्णोद्धार कर इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है।
यात्रियों की सुविधा हेतु यहाँ धर्मशाला एवं भोजनशाला की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है।
श्री मुनिसुव्रत स्वामी मंदिर, मालपुरा
मालपुरा नगर के मध्य स्थित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन एवं आकर्षक है। लगभग 40 वर्ष पूर्व हीरविजय द्वारा प्रतिष्ठित इस प्राचीन मंदिर का तपागच्छ संघ द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया।
श्री जैन श्वेताम्बर श्रीमाल सभा द्वारा संचालित जिनालय
श्री पार्श्वनाथ स्वामी प्राचीन जिनालय
जौहरी बाज़ार के घीवालों के रास्ते में स्थित यह लगभग 200 वर्ष प्राचीन मंदिर अत्यंत सुन्दर एवं कलात्मक है। मंदिर की दीवारों पर की गई पच्चीकारी इसकी शोभा को बढ़ाती है।
मूलगर्भगृह के दाहिनी ओर 70 चरणों की स्थापना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिनमें भगवान महावीर से प्रारम्भ होकर उनके पट्टधर गणधर सुधर्मा स्वामी, अंतिम केवली जम्बू स्वामी आदि के चरण क्रमशः दर्शनीय हैं।
श्री सांवलिया पार्श्वनाथ स्वामी मंदिर एवं दादाबाड़ी
मोती डूंगरी मार्ग पर स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर एवं दादाबाड़ी विगत वर्षों में अत्यंत भव्य रूप में विकसित किया गया है।
यहाँ नयनाभिराम नंदीश्वर द्वीप, अष्टापद आदि की कलात्मक रचनाएँ निर्मित की गई हैं। साथ ही सम्मत शिखर तीर्थ के अधिष्ठाता भोमिया बाबा का भी एक सुन्दर गर्भगृह निर्मित है।
प्राचीन दादाबाड़ी का जीर्णोद्धार कर इसे संगमरमर से निर्मित अत्यंत आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया है, जिसमें रंगमंडप विशेष रूप से मनोहारी है।
मंदिर परिसर में विशाल उपाश्रय, धर्मशाला एवं भोजनशाला की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।
श्री आदिनाथ स्वामी मंदिर, मालपुरा
मालपुरा नगर में श्रीमाल सभा द्वारा प्राचीन आदिनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कर एक नवीन शिखरबद्ध मंदिर का निर्माण कराया गया है, जो आज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
श्री जैन श्वेताम्बर मुलतान सभा द्वारा संचालित जिनालय
श्री महावीर स्वामी मंदिर, आदर्शनगर
मुलतान, पाकिस्तान से आए जैन समुदाय द्वारा स्थापित यह मंदिर आदर्शनगर के धोबियों के मोड़ के समीप स्थित है। लगभग 35 वर्ष पूर्व निर्मित इस शिखरबद्ध मंदिर के साथ दादाबाड़ी, उपाश्रय एवं धर्मशाला की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
समापन टिप्पणी
इस प्रकार जयपुर में श्वेताम्बर जैन मंदिरों का संचालन केवल एक गच्छ या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न संघों, सभाओं और ट्रस्टों के समन्वित प्रयासों से यह धार्मिक-सांस्कृतिक संरचना विकसित हुई है, जो शहर की बहुलतावादी जैन परंपरा को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती है।
जयपुर के श्वेताम्बर जैन मंदिर एवं दादाबाड़ी भाग 1
क्रमशः

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